हिन्दू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा गया है—अर्थात वे जीवन की हर बाधा, चिंता और संकट को दूर करते हैं। हर माह दो चतुर्थी आती हैं, जिनमें से पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।
संकष्टी शब्द का अर्थ है—
संकट + हरना
यानी वह दिन जब भगवान गणेश अपने भक्तों के संकट दूर करते हैं।
संकष्टी चतुर्थी 2025 का महत्व
संकष्टी चतुर्थी का व्रत और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है क्योंकि—
- यह मानसिक शांति प्रदान करती है
- बाधाएँ दूर करती है
- शुभ कार्यों में सफलता दिलाती है
- परिवार में सुख, समृद्धि और सौभाग्य बढ़ाती है
- चंद्रमा के दर्शन और चंद्रोदय पूजन से मन की नकारात्मकता कम होती है
पौष मास की संकष्टी चतुर्थी को ध्यान, व्रत, मंत्र-जप और दान को विशेष शुभ माना गया है।
संकष्टी चतुर्थी पर पूजा कैसे की जाती है?
- सुबह स्नान कर गणेश जी का स्वच्छ रूप से पूजन करें
- धूप, दीप, अक्षत, लाल फूल और दूर्वा चढ़ाएं
- गणेश मंत्र का जप करें – “ॐ गं गणपतये नमः”
- पूरे दिन व्रत रखा जाता है
- शाम को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा और गणेश जी का संयुक्त पूजन किया जाता है
- कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है
संकष्टी चतुर्थी और गौ सेवा – दिव्य संबंध
शास्त्रों में कहा गया है कि गौ माता गणेश जी को अत्यंत प्रिय हैं, और गौ सेवा को गणेश भक्ति का श्रेष्ठ स्वरूप माना गया है।
Shree Ji Gau Sewa Society इस पवित्र दिन पर सभी भक्तों को गौ सेवा का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करती है, क्योंकि—
गौ सेवा से विघ्न दूर होते हैं
मन और परिवार में शांति आती है
भक्ति और पुण्य बढ़ता है
संकष्टी चतुर्थी का फल अनेक गुना बढ़ जाता है
आप इस दिन निम्न सेवा कर सकते हैं:
- एक मुट्ठी चारा अर्पित करना
- गौ माता के लिए पानी की व्यवस्था
- गौशाला में जरूरत के अनुसार दान
- दिनभर की सेवा या प्रेमपूर्वक स्पर्श
Shree Ji Gau Sewa Society का उद्देश्य केवल गौ माता की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि समाज में सेवा, करुणा और संस्कारों का संदेश फैलाना है।
हिन्दू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा गया है—अर्थात वे जीवन की हर बाधा, चिंता और संकट को दूर करते हैं। हर माह दो चतुर्थी आती हैं, जिनमें से पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।
संकष्टी शब्द का अर्थ है—
संकट + हरना
यानी वह दिन जब भगवान गणेश अपने भक्तों के संकट दूर करते हैं।
संकष्टी चतुर्थी 2025 का महत्व
संकष्टी चतुर्थी का व्रत और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है क्योंकि—
पौष मास की संकष्टी चतुर्थी को ध्यान, व्रत, मंत्र-जप और दान को विशेष शुभ माना गया है।
संकष्टी चतुर्थी पर पूजा कैसे की जाती है?
संकष्टी चतुर्थी और गौ सेवा – दिव्य संबंध
शास्त्रों में कहा गया है कि गौ माता गणेश जी को अत्यंत प्रिय हैं, और गौ सेवा को गणेश भक्ति का श्रेष्ठ स्वरूप माना गया है।
Shree Ji Gau Sewa Society इस पवित्र दिन पर सभी भक्तों को गौ सेवा का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करती है, क्योंकि—
गौ सेवा से विघ्न दूर होते हैं
मन और परिवार में शांति आती है
भक्ति और पुण्य बढ़ता है
संकष्टी चतुर्थी का फल अनेक गुना बढ़ जाता है
आप इस दिन निम्न सेवा कर सकते हैं:
Shree Ji Gau Sewa Society का उद्देश्य केवल गौ माता की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि समाज में सेवा, करुणा और संस्कारों का संदेश फैलाना है।
Share This:
admin
Related Posts
बैसाखी का पर्व भारत में खुशी, समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक है। यह दिन…
In today’s fast-paced digital world, people often struggle to find time for meaningful social or…
हनुमान जयंती का यह पावन अवसर हमें भक्ति, निस्वार्थ सेवा और अद्भुत शक्ति की प्रेरणा…
राम नवमी का पावन पर्व मर्यादा, सत्य और धर्म के प्रतीक भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव…
Navratri is one of the most sacred festivals in India, celebrating the divine power of…
In many cities and villages, cows often wander on roads in search of food and…
होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्रेम, सद्भाव, त्याग और सेवा का…
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य मानसिक तनाव, चिंता और असंतोष से घिरा हुआ…
When you search for “animal shelter near me”, it often comes from a place of…
भारतीय संस्कृति में “दान” को धर्म का महत्वपूर्ण अंग माना गया है। अन्नदान, विद्या दान,…